किशोरों के भावनात्मक नियमन पर सोशल मीडिया का प्रभाव

लेखक

  • डॉ. अरविंद सिंह सह-आचार्य, फीरोज गाांधी कॉलेज रायबरेली, उत्तर प्रदेश सहयुक्त लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश ##default.groups.name.author##
  • अमूल कुमार कन्नौजिया शोधार्थी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i4.34

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किशोरावस्था##common.commaListSeparator## भावनात्मक नियमन##common.commaListSeparator## सोशल मीडिया##common.commaListSeparator## शैक्षिक अध्ययन##common.commaListSeparator## मानसिक स्वास्थ्य

सार

वर्तमान में सोशल मीडिया किशोरों के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चूका है, किन्तु सोशल मीडिया पर व्यतीत किया जाने वाला अत्यधिक समय उनके मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक अन्तःक्रियाओं, पहचान निर्माण तथा भावनात्मक नियमन को प्रभावित करता है। तथापि, सोशल मीडिया से किशोरों को अनेक लाभ भी प्राप्त होते हैं, जैसे सामाजिक जुड़ाव में वृद्धि, अकेलेपन में कमी तथा हाशिए पर स्थित समूहों के लिए सुरक्षित संवाद का मंच उपलब्ध कराना। अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य सोशल मीडिया उपयोग के स्तर तथा किशोरों के भावनात्मक नियमन के मध्य संबंध की पहचान करना तथा यह जाँच करना कि सोशल मीडिया का उपयोग किस सीमा तक भावनात्मक नियमन को प्रभावित करता है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि किशोरों में सोशल मीडिया का उपयोग आज दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है तथा संचार एवं अधिगम का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। तथापि, इसके अत्यधिक उपयोग का समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। साहित्य समीक्षा से यह स्पष्ट होता है कि किशोरों में सोशल मीडिया के समस्यात्मक उपयोग की प्रवृत्ति निरंतर बढ़ रही है, जिसके परिणामस्वरूप वे भावनात्मक नियमन में विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। अतः आवश्यक है कि उन्हें जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग के लिए आत्म-नियमन के कौशल  एवं उपयुक्त रणनीतियाँ सिखाई जाएँ। प्रस्तुत अध्ययन एक वैचारिक अध्ययन है, जिसमें किशोरावस्था में सोशल मीडिया के उपयोग का भावनात्मक नियमन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि किशोरों में सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग का संबंध भावनात्मक नियमन के निम्न स्तर से है। विशेष रूप से, अधिक समय तक सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक पुनर्मूल्यांकन की क्षमता अपेक्षाकृत कम तथा भावनाओं के दमन की प्रवृत्ति अधिक पाई गई। इसके विपरीत, संतुलित एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग करने वाले किशोरों में भावनात्मक नियमन की क्षमता अधिक प्रभावी पाई गई।

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प्रकाशित

2026-04-30

अंक

खंड

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