पंडित दीनदयाल उपाध्याय के शैक्षिक विचार एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक तुलनात्मक अध्ययन

Authors

  • सैयद अब्दुल वाहिद शाह शोध छात्र, बी. एड. विभाग, बरेली कॉलेज, बरेली Author
  • प्रोफेसर (डा.) अनीता सिंह प्रोफेसर बी. एड. विभाग, बरेली कॉलेज, बरेली Author

DOI:

https://doi.org/10.65785/vijact.v2i2.15

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र बहुमुखी प्रतिभा के धनी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के शैक्षिक विचारों एवं भारत सरकार द्वारा 2020 में लायी गयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मध्य समानताओं एवं असमानताओं का विश्लेषण करने का एक सूक्ष्म प्रयास है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी भारतीय राजनीति के प्रमुख स्तम्भ होने के साथ ही साथ उच्च कोटि के विचारक, लेखक एवं दार्शनिक थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से सम्बन्धित विषयों एवं समस्याओं पर अपने विचारों के माध्यम से भारतीयों एवं सम्पूर्ण विश्व को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है, आपके विचार हमेशा प्रासंगिक थे, हैं और रहेंगे। आपके शैक्षिक एवं दार्शनिक विचार आपके राजनैतिक विचारों एवं कार्या जितने ही उच्च कोटि के रहे हैं इसका प्रमाण उनके द्वारा प्रतिपादित ’’एकात्म मानववाद‘‘ दार्शनिक विचारधारा में भारतमीय सभ्यता, संस्कृति, स्वदेशी चेतना, मानवीय मूल्य और नैतिकता का अनौखा समावेश है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा-2020 में शैक्षिक गुणवत्ता, भारतीय शैक्षिक परम्परा, बहुभाषिकता, समावेशिता, लचीलापन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुकूल शिक्षा पर केन्द्रित है। यह अध्ययन उपरोक्त दृष्टिकोणों के बीच समानता एवं असमानता का अध्ययन करने का एक सूक्ष्म प्रयास है, जिसके माध्यम से यह ज्ञात किया जा सके कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के शैक्षिक एवं दार्शनिक विचारों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 कितनी प्रभावित है। यह शोध पत्र पंडित उपाध्याय के शैक्षिक सिद्धांतों और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के मध्य मौजूद अंतर्संबंधों, समानताओं और भविष्योन्मुखी संभावनाओं का एक विस्तृत और सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

Keywords: पंडित दीनदयाल उपाध्याय, शैक्षिक विचार, एकात्म मानववाद, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, तुलनात्मक अध्ययन

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Published

2026-02-28

How to Cite

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के शैक्षिक विचार एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक तुलनात्मक अध्ययन. (2026). VED International Journal of Arts, Commerce and Technology, 2(2), 23-29. https://doi.org/10.65785/vijact.v2i2.15