उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के पुनरुद्धार में अपशिष्ट जल प्रबंधन की भूमिका: उपलब्धियों एवं चुनौतियों का विश्लेषण
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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i8.85सार
गंगा नदी भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा पारिस्थितिक व्यवस्था की आधारभूत जीवनरेखा है। उत्तर प्रदेश में गंगा का विस्तृत प्रवाह क्षेत्र अनेक बड़े नगरों, औद्योगिक क्षेत्रों तथा घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है। घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह तथा अन्य मानवजनित गतिविधियाँ गंगा की जल गुणवत्ता एवं पारिस्थितिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। गंगा के पुनरुद्धार के लिए गंगा एक्शन प्लान से लेकर वर्तमान नमामि गंगे कार्यक्रम तक अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इनमें सीवेज उपचार संयंत्र (STP), सीवर नेटवर्क, नालों का इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन, औद्योगिक अपशिष्ट नियंत्रण तथा जल गुणवत्ता निगरानी प्रमुख हैं। प्रस्तुत समीक्षा का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में इन रणनीतियों की उपलब्धियों, सीमाओं एवं भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण करना है। उपलब्ध सरकारी एवं वैज्ञानिक साहित्य से स्पष्ट होता है कि सीवेज उपचार अवसंरचना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जनवरी 2026 तक नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर 173 STP तथा 3,976 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) उपचार क्षमता चालू की जा चुकी थी (Ministry of Jal Shakti, 2026)। तथापि, वास्तविक सीवेज संग्रहण, STP की उपयोग क्षमता, संचालन एवं रखरखाव, औद्योगिक अपशिष्ट तथा उभरते प्रदूषकों की निगरानी अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। अतः भविष्य की रणनीति को केवल STP निर्माण तक सीमित न रखकर पूर्ण सीवेज प्रबंधन, उपचारित जल के पुनः उपयोग, विकेंद्रीकृत उपचार, प्रकृति-आधारित समाधान तथा डिजिटल निगरानी पर केंद्रित करना आवश्यक है।
Keywords: गंगा नदी, अपशिष्ट जल प्रबंधन, सीवेज उपचार, नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश, पुनरुद्धार, जल प्रदूषण
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