भारतीय लोकतंत्र में महिला आंदोलनों एवं दबाव समूहों की भूमिका: 2011–2020 का एक अध्ययन
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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i8.80सार
भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिला आंदोलन और महिला-केंद्रित दबाव समूहों की भूमिका राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम बनी है। साल 2011 से 2020 तक के दस सालों में, भारत में महिला संगठन जैसे महिला अधिकार समूह, यौन-हिंसा विरोधी आंदोलन, कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार के संगठन, और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए बने समूह ने सरकारी नीतियों को आकार देने और समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने में सक्रिय भूमिका निभाई है। इस शोधपत्र में महिला आंदोलनों के सकारात्मक योगदान (महिला सुरक्षा कानून, लैंगिक समानता, कार्यस्थल में समानता, शिक्षा का अधिकार) और उनकी चुनौतियों (राजनीतिक बाधाएँ, सांस्कृतिक प्रतिरोध, संसाधनों की कमी, असमान प्रतिनिधित्व) का विश्लेषण किया गया है। आँकड़ों से पता चलता है कि भारत में लगभग 220 से अधिक पंजीकृत महिला-केंद्रित संगठन सक्रिय रहे, जिनमें 75% ने महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों पर काम किया। यह अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि महिला आंदोलन भारतीय लोकतंत्र के लिए अत्यावश्यक हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता वित्तीय स्वतंत्रता, राजनीतिक समर्थन, और संस्थागत मजबूती पर निर्भर करती है।
मुख्य शब्द: महिला आंदोलन, दबाव समूह, लैंगिक समानता, महिला सुरक्षा, भारतीय लोकतंत्र
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