भारतीय ज्ञान परम्परा का आज के युवाओं पर सकारात्मक प्रभाव
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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i8.79सार
भारतीय ज्ञान परम्परा भारत की प्राचीन बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है, जिसमें वेद, उपनिषद, भारतीय दर्शन, योग, आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य और नैतिक मूल्यों जैसी विविध ज्ञान-धाराएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल ज्ञान का संचय करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्मबोध, चरित्र निर्माण, संतुलित जीवन और लोककल्याण की भावना का विकास करना रहा है। वर्तमान समय में भारतीय युवा तकनीकी विकास, वैश्वीकरण, उपभोक्तावाद और तीव्र सामाजिक परिवर्तन के बीच आगे बढ़ रहे हैं, जिसके कारण उनके सामने तनाव, नैतिक भ्रम, सांस्कृतिक दूरी और पहचान से जुड़ी चुनौतियाँ भी उभर रही हैं। ऐसे परिवेश में भारतीय ज्ञान परम्परा युवाओं के लिए एक उपयोगी वैचारिक और व्यावहारिक आधार प्रदान कर सकती है। प्रस्तुत अध्ययन में भारतीय ज्ञान परम्परा के युवाओं पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का समकालीन संदर्भ में विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में योग और ध्यान के माध्यम से मानसिक संतुलन, भारतीय दर्शन से आत्मचिन्तन एवं तार्किक दृष्टि, तथा पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से सांस्कृतिक गौरव और आत्मविश्वास के विकास को प्रमुखता दी गई है। साथ ही, आयुर्वेद, वैदिक गणित और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक तथा उद्यमिता से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। अध्ययन यह संकेत करता है कि भारतीय ज्ञान परम्परा को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी परिवेश के साथ सार्थक रूप से जोड़ा जाए तो यह युवाओं के समग्र व्यक्तित्व-विकास, नवाचार, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और मूल्यपरक जीवन के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।
Keywords: आत्म बोध, आत्मचिन्तन, वेद, उपनिषद, पुराण, साहित्य भारतीय युवा, योग और ध्यान, भारतीय दर्शन, समग्र विकास
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