स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक विचारों की वर्तमान युग में उपादेयता

लेखक

  • विजय सिंह शोधार्थी, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर ##default.groups.name.author##
  • डॉ. निरूपमा जैन शोध निर्देशिका, राजस्थान महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, उदयपुर ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i7.68

सार

शिक्षा मानव विकास का मूल साधन है। इसके माध्यम से व्यक्ति के अंतर्निहित गुणों का विकास होता है, उसका ज्ञान और कौशल बढ़ता है, और वह एक जिम्मेदार नागरिक बनता है। किंतु वर्तमान समय की शिक्षा व्यवस्था केवल तकनीकी कौशल और रोजगार पर केंद्रित हो गई है। नैतिक मूल्य, चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास इसमें नगण्य रह गया है। स्वामी विवेकानंद का शैक्षिक चिंतन इसी खाई को पाटने का प्रयास करता है। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं है, बल्कि मानव का निर्माण करना है। वह विश्वास करते थे कि शिक्षा से आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, नैतिकता और सेवा भावना का विकास होता है। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि उनके शैक्षिक विचार आज की शिक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। चरित्र निर्माण, सर्वांगीण विकास, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में उनके विचार वर्तमान शिक्षा को नई दिशा दे सकते हैं।

Keywords: स्वामी विवेकानंद, शैक्षिक विचार, शैक्षिक दर्शन, चरित्र निर्माण, वर्तमान शिक्षा

 

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प्रकाशित

2026-07-31

अंक

खंड

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