राम मनोहर लोहिया के समाजवादी विचारों का समकालीन भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण

लेखक

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह डिग्री कॉलेज हेवरा इटावा ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.65785/tbx47205

सार

प्रस्तुत शोध-पत्र भारतीय समाजवादी चिंतन परंपरा के अग्रणी विचारक डॉ. राम मनोहर लोहिया के समाजवादी विचारों का अध्ययन करते हुए उनकी समकालीन भारतीय राजनीति में प्रासंगिकता का विश्लेषण करता है। लोहिया का समाजवाद केवल आर्थिक समानता तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय, जाति-उन्मूलन, सत्ता के विकेंद्रीकरण और लोकतांत्रिक मूल्यों के समन्वय पर आधारित था। इस अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य यह परखना है कि स्वतंत्रता-पूर्व एवं स्वतंत्रता-उपरांत भारत के संदर्भ में विकसित लोहिया का वैचारिक ढाँचा क्या आज के सामाजिक न्याय आधारित राजनीतिक विमर्श को समझने में सहायक है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि पिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जातिगत असमानता के प्रश्न और जनभागीदारी आधारित लोकतंत्र की माँग के रूप में लोहियावादी चिंतन की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। साथ ही पत्र यह भी रेखांकित करता है कि लोहिया के अनेक आदर्श व्यावहारिक राजनीति में अधूरे रहे हैं।

प्रमुख शब्द: समाजवाद, सामाजिक न्याय, जाति व्यवस्था, विकेंद्रीकरण, लोकतांत्रिक समाजवाद, लोहियावाद, पिछड़ा वर्ग।

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प्रकाशित

2026-05-31

अंक

खंड

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