वैदिक कार्य संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित प्रबंधन मॉडल: पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में कर्मचारी स्थायित्व और कार्य जीवन संतुलन हेतु एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

लेखक

  • डॉ. आशीष कुमार पोस्ट डॉक्टरल फेलो, ICSSR, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार ##default.groups.name.author##
  • डॉ. उमाकांत इंदौलिया एसोसिएट प्रोफेसर, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार ##default.groups.name.author##
  • डॉ. अरुणेश पाराशर एसोसिएट प्रोफेसर, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार ##default.groups.name.author##

##semicolon##

https://doi.org/10.65785/3bjd6924

सार

यह अध्ययन वैदिक कार्य-संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा आधुनिक प्रबंधन सिद्धांतों के समन्वय के माध्यम से पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में कर्मचारी स्थायित्व और कार्य जीवन संतुलन की चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। वैदिक साहित्य ऋग्वेद, यजुर्वेद, उपनिषद, स्मृति-ग्रंथ एवं वेदांग में वर्णित कर्म-योग, यज्ञ भावना, समत्व, तप, सत्य और लोक संग्रह जैसे सिद्धांत आधुनिक मानव संसाधन प्रबंधन, संगठनात्मक व्यवहार एवं कार्यस्थल आध्यात्मिकता के मूल तत्वों से साम्य रखते हैं। आध्यात्मिक पर्यटन एवं आतिथ्य उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों को अत्यधिक कार्य-दबाव, अनियमित कार्य समय, भावनात्मक श्रम, मौसमी भीड़ और सीमित व्यक्तिगत समय जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे उच्च पलायन और असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती है। इस वैचारिक अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य Vedic Work Culture Based Management Model (VWCM-Model) का प्रतिपादन करना है, जो कर्मचारी कल्याण, संगठनात्मक प्रतिबद्धता, नैतिक नेतृत्व और सेवा-गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाता है। अध्ययन के निष्कर्ष पर्यटन नीति, HRD, प्रशिक्षण एवं नेतृत्व विकास कार्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन हेतु सैद्धांतिक आधार प्रदान करते हैं।

Keywords: वैदिक कार्य-संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, कार्यस्थल आध्यात्मिकता कर्मचारी स्थायित्व, कार्य जीवन संतुलन, पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन

##submission.downloads##

प्रकाशित

2026-05-31

अंक

खंड

Articles

##submission.howToCite##

वैदिक कार्य संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित प्रबंधन मॉडल: पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में कर्मचारी स्थायित्व और कार्य जीवन संतुलन हेतु एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2026). VED International Journal of Arts, Commerce and Technology, 2(5), 01-06. https://doi.org/10.65785/3bjd6924