आधुनिक भारत में राष्ट्रवाद के उदय और विकास का ऐतिहासिक अध्ययन

लेखक

  • डॉ. तनुजा गुप्ता विभागाध्यक्षा, बी.एड. विभाग, माां ववांध्यवासिनी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, पद्मा, हजारीबाग़ ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i3.25

सार

भारतीय राष्ट्रवाद का विकास कोई अचानक घटना नहीं थी, बल्कि यह एक दीर्घकालीन ऐतिहासिक प्रक्रिया थी जो औपनिवेशिक शासन, आर्थिक शोषण, आधुनिक शिक्षा के प्रसार और सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप विकसित हुई। 18वीं-19वीं शताब्दी में ब्रिटिश राज की स्थापना के साथ भारतीय समाज में आधुनिक राजनीतिक चेतना का जन्म हुआ। शिक्षित भारतीय मध्यम वर्ग ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संगठित प्रतिरोध का आधार तैयार किया। 1857 का विद्रोह यद्यपि पूर्ण रूप से आधुनिक राष्ट्रवादी आंदोलन नहीं था, किंतु इसने राष्ट्रीय चेतना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों ने भारतीय समाज में नई राजनीतिक सचेतता और आत्मविश्वास का संचार किया। आर्थिक राष्ट्रवाद की विचारधारा ने भारतीय नेताओं को औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों की आलोचना करने के लिए प्रेरित किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संगठन था। बंगाल विभाजन के बाद स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन राष्ट्रवाद को अधिक सक्रिय और जनोन्मुख बनाता रहा। महात्मा गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रवाद शिक्षित अभिजात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक जनसमुदाय का आंदोलन बन गया। किसान, श्रमिक, महिलाएँ और विद्यार्थी सभी इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से गांधीवादी राष्ट्रवाद ने भारत को 1947 में स्वतंत्रता दिलाई। यह अध्ययन राष्ट्रवाद के उदय से लेकर स्वतंत्रता तक की ऐतिहासिक यात्रा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

Keywords: राष्ट्रवाद, औपनिवेशिक शासन, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, स्वदेशी आंदोलन, स्वतंत्रता संघर्ष

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प्रकाशित

2026-03-31

अंक

खंड

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