ग्रामीण पर्यावरण में नगरीकरण से उत्पन्न सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तनों का विश्लेषण

लेखक

  • अवनीश कुमार शोध छात्र, वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ##default.groups.name.author##
  • डॉ० हरिओम गुप्ता एसोसिएट प्रोफेसर, वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i2.18

सार

भारत में नगरीकरण अब केवल महानगरों तक सीमित परिघटना नहीं रह गई, बल्कि यह ग्रामीण अंचल की सामाजिक‑आर्थिक बुनावट को गहराई से बदल रही है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य गोरखपुर जिले के संदर्भ में नगरीकरण से उपजे ग्रामीण सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तनों का विश्लेषण करना है। अध्ययन द्वितीयक आँकड़ों पर आधारित विश्लेषणात्मक प्रकृति का है, जिसमें जनगणना 2011, जनसंख्या प्रक्षेपण एवं शासकीय प्रतिवेदनों के आँकड़ों का प्रतिशत, वृद्धि‑दर एवं तुलनात्मक विधि से परीक्षण किया गया। परिकल्पना यह रही कि नगरीकरण के साथ ग्रामीण जनसंख्या का सापेक्ष अनुपात घट रहा है तथा कृषि पर निर्भरता कम होकर गैर‑कृषि रोज़गार, साक्षरता एवं पलायन बढ़ रहा है। परिणाम दर्शाते हैं कि जिले की 81.17 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या के बावजूद नगरीय हिस्सा तेज़ी से बढ़ रहा है, ग्रामीण‑नगरीय साक्षरता अंतराल बना हुआ है, और रोज़गार‑ढाँचा कृषि से सेवा‑निर्माण क्षेत्र की ओर खिसक रहा है। निष्कर्ष यह है कि नगरीकरण अवसर एवं असमानता, दोनों को साथ लाता है, अतः संतुलित ग्राम‑नगर नियोजन आवश्यक है।

Keywords: नगरीकरण, ग्रामीण परिवर्तन, सामाजिक‑आर्थिक रूपांतरण, पलायन, गोरखपुर

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प्रकाशित

2026-02-28

अंक

खंड

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