मानसिक स्वास्थ्य के प्रति युवाओं की जागरूकता का समाजशास्त्रीय अध्ययन

लेखक

  • डॉ. आदित्य कुमार सहायक आचार्य, समाजशास्त्र विभाग, चौधरी चरण सिंह डिग्री कालेज, हेवरा, इटावा ##default.groups.name.author##

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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i2.16

सार

मानसिक स्वास्थ्य आज भारतीय युवाओं के समक्ष सबसे गंभीर सामाजिक चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है, फिर भी इसके प्रति जागरूकता और सहायता-प्राप्ति का स्तर निम्न बना हुआ है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति ज्ञान, दृष्टिकोण और जागरूकता का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना तथा सहायता-प्राप्ति में बाधक सामाजिक कारकों की पहचान करना है। यह एक वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक द्वितीयक-आँकड़ा अध्ययन है, जिसमें राष्ट्रीय सर्वेक्षणों, सरकारी रिपोर्टों तथा 2016 से 2025 तक के समकक्ष-समीक्षित शोधों का विषयवस्तु विश्लेषण किया गया है। परिकल्पना यह थी कि उच्च प्रसार के बावजूद जागरूकता निम्न है तथा सामाजिक कलंक एवं कम साक्षरता सहायता-प्राप्ति को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। परिणाम दर्शाते हैं कि देश में उपचार-अंतराल लगभग 84 प्रतिशत है, विद्यार्थी आत्महत्याएँ निरंतर बढ़ रही हैं, और सामाजिक मीडिया तनाव बढ़ा रहा है। विवेचना से स्पष्ट होता है कि कलंक, परिवार और शैक्षणिक दबाव प्रमुख निर्धारक हैं। निष्कर्षतः, विद्यालय-आधारित जागरूकता और कलंक-न्यूनीकरण कार्यक्रम अत्यावश्यक हैं।

Keywords: मानसिक स्वास्थ्य, युवा जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता, सामाजिक कलंक, सहायता-प्राप्ति व्यवहार

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प्रकाशित

2026-02-28

अंक

खंड

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