वैश्विक युग में भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता : एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

Authors

  • डॉ. निरपेंन्द्र कुमार सिन्हा असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, सर्व नारायण सिंह राम कुमार सिंह महाविद्यालय, सहरसा, बिहार Author

DOI:

https://doi.org/10.65785/vijact.v2i8.83

Abstract

भारतीय संस्कृति का विकास हजारों वर्षों में हुआ है और यह धर्म, परंपरा, मूल्यबोध तथा सामाजिक आचरण का एक अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करती है। वर्तमान समय में वैश्वीकरण, आधुनिकीकरण, तकनीकी क्रांति एवं बाजारीकरण की प्रक्रियाओं ने भारतीय समाज के सांस्कृतिक तानेबाने को गहराई से प्रभावित किया है। परिवार की संरचना में परिवर्तन, युवा पीढ़ी की बदलती जीवनशैली, परंपरागत मूल्यों के प्रति क्षीण आस्था तथा नई सामाजिक व्यवस्था का उदय - ये सभी परिघटनाएँ एक ऐसे समय में घटित हो रही हैं जब सत्य, अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता एवं सामूहिकता जैसे भारतीय मानवीय मूल्यों की समकालीन प्रासंगिकता पुनः परीक्षण की माँग करती है। यह शोध-पत्र एक समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों के परिवर्तनशील स्वरूप का विश्लेषण करता है। इसमें वैश्वीकरण की प्रक्रिया, परंपरा-आधुनिकता के द्वंद्व, पारिवारिक संस्थाओं में आने वाले बदलाव, शिक्षा व्यवस्था की भूमिका तथा सामाजिक संबंधों के नवीन आयामों को समाजशास्त्रीय अवधारणाओं के माध्यम से विवेचित किया गया है। शोध का निष्कर्ष यह है कि भारतीय मानवीय मूल्य केवल आध्यात्मिक या नैतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि समकालीन सामाजिक विषमता, सांप्रदायिक विभाजन, पारस्परिक अविश्वास तथा पर्यावरणीय संकट के समाधान में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। वैश्विक परिवेश में भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की सार्थकता उनकी सामाजिक उपयोगिता, समसामयिक संदर्भों में पुनर्व्याख्या तथा मानवीय गरिमा को बनाए रखने की क्षमता पर अवलंबित है।

Keywords: भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्य, वैश्वीकरण, सामाजिक परिवर्तन, समाजशास्त्रीय अध्ययन

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Published

2026-08-31

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How to Cite

वैश्विक युग में भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता : एक समाजशास्त्रीय अध्ययन. (2026). VED International Journal of Arts, Commerce and Technology (VIJACT), 2(8), 50-60. https://doi.org/10.65785/vijact.v2i8.83