Geneva Gay के सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षाशास्त्रीय ढांचे का भारतीय विद्यालयी शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में समालोचनात्मक विश्लेषण

लेखक

  • दीपा सिंह शोधार्थी, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय (उ०प्र०) ##default.groups.name.author##
  • विकास कुमार शोधार्थी, शिक्षाशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय (उ०प्र०) ##default.groups.name.author##
  • डॉ. जूली सोनकर सहायक प्रोफेसर, महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज, अमीनाबाद, लखनऊ (उ०प्र०) ##default.groups.name.author##

##semicolon##

https://doi.org/10.65785/a74p4w96

सार

भारत की विद्यालयी शिक्षा बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक एवं सामाजिक रूप से विविध शिक्षार्थियों को समाहित किए हुए है, जिसके कारण ऐसी शिक्षण पद्धति की आवश्यकता है जो सांस्कृतिक विविधता को अधिगम का संसाधन मानते हुए समानता, समावेशन तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुदृढ़ कर सके। Geneva Gay द्वारा प्रतिपादित सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षाशास्त्र (Culturally Responsive Teaching) इस दिशा में एक प्रभावशाली सैद्धांतिक आधार प्रस्तुत करता है। तथापि, यह अवधारणा मुख्यतः पश्चिमी सामाजिक-शैक्षिक संदर्भों में विकसित हुआ है तथा भारतीय विद्यालयी शिक्षा की बहुभाषिकता, भारतीय ज्ञान प्रणाली, स्थानीय एवं जनजातीय ज्ञान परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में इसका समग्र समालोचनात्मक विश्लेषण अपेक्षाकृत सीमित है। इसी शोध-अंतर को संबोधित करते हुए प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य Geneva Gay के शिक्षाशास्त्रीय ढाँचे का भारतीय विद्यालयी शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में समालोचनात्मक विश्लेषण करना करना है। यह अध्ययन वैचारिक (Conceptual) एवं समालोचनात्मक साहित्य समीक्षा (Critical Literature Review) पर आधारित है, जिसमें Geneva Gay के प्रमुख सिद्धांतों, उनकी शक्तियों एवं सीमाओं का विश्लेषण करते हुए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा–विद्यालयी शिक्षा 2023, भारतीय ज्ञान प्रणाली, बहुभाषिक शिक्षा तथा भारतीय संविधान के समानता, समावेशन एवं सामाजिक न्याय संबंधी मूल्यों के साथ समन्वित किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि Geneva Gay का ढाँचा सांस्कृतिक विविधता, समावेशी शिक्षण तथा न्यायसंगत कक्षा-व्यवहार के लिए सुदृढ़ आधार प्रदान करता है, किन्तु भारतीय विद्यालयी शिक्षा की विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक एवं भाषाई आवश्यकताओं के अनुरूप इसके पुनर्संदर्भीकरण (Recontextualization) की आवश्यकता है। अध्ययन का प्रमुख योगदान Geneva Gay के सिद्धांतों को भारतीय ज्ञान प्रणाली, बहुभाषिक शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों तथा NEP 2020 के साथ एकीकृत करते हुए भारतीय विद्यालयी शिक्षा के लिए सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षाशास्त्र की एक गहरी समझ प्रदान करती हैं।

Keywords:  Geneva Gay, भारतीय विद्यालयी शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली, बहुभाषिक शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, NCF-SE, 2023, समावेशी शिक्षा, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक शिक्षण

##plugins.themes.default.displayStats.downloads##

##plugins.themes.default.displayStats.noStats##

##submission.downloads##

प्रकाशित

2026-06-30

अंक

खंड

Articles