कैंसर रोगियों में कीमोथेरेपी-प्रेरित परिधीय न्यूरोपैथी (CIPN) के प्रबंधन में योग की प्रभावशीलता: एक साक्ष्य-आधारित समीक्षा
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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i6.51Abstract
कीमोथेरेपी-प्रेरित परिधीय न्यूरोपैथी (CIPN) कैंसर उपचार पद्धति का एक गंभीर दुष्प्रभाव है, जो न्यूरोटॉक्सिक कीमोथेरेपी के कारण परिधीय तंत्रिकाओं की क्षति या शिथिलता के कारण उत्पन्न होती है। CIPN के प्रमुख संवेदी लक्षण (दर्द, झनझनाहट, सुन्नता, जलन,असंतुलन तथा मांसपेशियों की कमजोरी आदि) रोगियों की जीवन-गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। CIPN के औषधीय उपचार सीमित और दुष्प्रभाव अधिक हैं। इसलिए वर्तमान में पूरक एवं वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर ध्यान बढ़ रहा है, जिसमें योग एक प्रभावी हस्तक्षेप हो सकता है। प्रस्तुत शोध का उद्देश्य “कैंसर रोगियों में CIPN के प्रबंधन में योग की प्रभावशीलता के बारे में पूर्व प्रकाशित अध्ययनों का विश्लेषण करना है”। इस अध्ययन में वर्ष 2000 से 2026 तक प्रकाशित नैदानिक परीक्षणों, यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों, अर्ध-प्रायोगिक अध्ययन शामिल है। साहित्य संग्रह के लिए पबमेड, गूगल स्कॉलर एवं अन्य डेटाबेस का उपयोग किया है। योग स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को संतुलन करके पैरासिम्पेथेटिक तंत्र की सक्रियता को बढ़ाता है तथा कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन को कम करता है। साथ ही, यह रक्त परिसंचरण एवं न्यूरोप्लास्टिसिटी को प्रोत्साहित कर तंत्रिका कार्य में सुधार करता है और दर्द अनुभूति के माड्यूलेशन द्वारा CIPN के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। कैंसर रोगियों में CIPN के संवेदी एवं शारीरिक लक्षणों के प्रबंधन में योगिक हस्तक्षेप एक प्रभावी पूरक एवं वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता के सुदृढ़ प्रमाण हेतु उच्च गुणवत्ता वाले, बहु-केंद्रित एवं बड़े नमूना आकार वाले अनुसंधानों की आवश्यकता है।
Keywords: कैंसर, कीमोथेरेपी, CIPN, वैकल्पिक चिकित्सा, मन-शरीर हस्तक्षेप,योग
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