ग्रामीण शिक्षा में डिजिटल समावेशन और सुगम्यता

Authors

  • कु० अनामिका शोध छात्रा, कु० आर०सी० महिला डिग्री कॉलेज, मैनपुरी (उ०प्र०) Author
  • प्रो० मधु गुप्ता विभागाध्यक्ष, शिक्षक शिक्षा विभाग, कु० आर०सी० महिला डिग्री कॉलेज, मैनपुरी (उ०प्र०) Author

DOI:

https://doi.org/10.65785/vijact.v2i4.39

Abstract

ग्रामीण क्षेत्रों में समान शिक्षा सुनिश्चित करने में डिजिटल समावेशन व सुगम्यता महत्वपूर्ण कारकों के रूप में उभरे हैं। डिजिटल तकनीकों में तेजी से हो रही प्रगति के साथ, शिक्षा प्रणालियों में बदलाव आ रहा है। हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों को अभी भी कई बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि जहाँ ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और सरकारी कार्यक्रमों जैसी पहलों ने शिक्षा की पहुँच को बेहतर बनाया है, वहीं सीमित इंटरनेट पहुँच, सामर्थ्य से जुड़े मुद्दों तथा भाषायी विविधता के कारण डिजिटल विभाजन अभी भी बना हुआ है। प्रस्तुत शोध पत्र उत्तर प्रदेश के एटा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा की वर्तमान स्थिति, सुगम्यता की चुनौतियों तथा डिजिटल समावेशन के प्रभावों का विश्लेषण करता है। जहाँ तकनीकी शिक्षा का अभिन्न अंग बन चुकी है, वहाँ यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि सरकारी पहलों और निजी प्रयासों के बावजूद क्या ग्रामीण छात्र मुख्यधारा की डिजिटल शिक्षा से जुड़ पाए हैं। परिणाम बताते हैं कि बुनियादी ढाँचे में सुधार के बावजूद "डिजिटल साक्षरता" तथा "निरंतर इंटरनेट कनेक्टिविटी" अभी भी प्रमुख बाधाएँ हैं।

Keywords: डिजिटल समावेशन, ग्रामीण शिक्षा, डिजिटल विभाजन, सुगम्यता, ई-लर्निंग

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Published

2026-04-30

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Section

Articles

How to Cite

ग्रामीण शिक्षा में डिजिटल समावेशन और सुगम्यता. (2026). VED International Journal of Arts, Commerce and Technology, 2(4), 58-65. https://doi.org/10.65785/vijact.v2i4.39