समकालीन समाज में भारतीय संस्कृति की चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ : एक समाजवैज्ञानिक विश्लेषण
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https://doi.org/10.65785/vijact.v2i4.32Abstract
वर्तमान सदी में भारतीय संस्कृति वैश्वीकरण, आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण, बाजारीकरण और शहरीकरण जैसी प्रभावशाली सामाजिक प्रक्रियाओं के बीच अपनी पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे नवीन परिस्थितियों में पुनर्निर्मित और पुनर्स्थापित करने हेतु निरंतर प्रयत्नशील है। प्रस्तुत शोधपत्र का लक्ष्य वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय संस्कृति के समक्ष खड़ी चुनौतियों जैसे कि पश्चिमीकरण के बढ़ते प्रभाव से उत्पन्न सांस्कृतिक विघटन, पारंपरिक भारतीय परिवार व्यवस्था का विघटन, उपभोक्तावाद का प्रसार, जातिआधारित सामाजिक असमानता, धर्म आधारित साम्प्रदायिकता/वैमनसता की नवीन प्रवृत्ति और सांस्कृतिक विकृतियों आदि का समाजवैज्ञानिक दृष्टि से विस्तृत विश्लेषण करना है।
प्रस्तुत अध्ययन में भारतीय संस्कृति की संभावनाओं जैसे योग और आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति, डिजिटल माध्यमों की बढ़ती उपयोगिता से सांस्कृतिक पुनर्जागरण, नीतिगत एवं संस्थागत हस्तक्षेप, सामाजिक पुनर्निर्माण में युवा पीढ़ी की बढ़ती भागीदारी और बहुसांस्कृतिक परंपरा की वैश्विक पहुँच आदि का विश्लेषण किया गया है। इस विश्लेषण में क्रियात्मक सिद्धांत, संघर्ष सिद्धांत, प्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद और आधुनिकरण सिद्धांत जैसे समाजवैज्ञानिक प्रावधानों का उपयोग किया गया है।
कुंजी शब्द : भारतीय संस्कृति, सांस्कृतिक क्षरण, वैश्वीकरण, योग, आयुर्वेद, सॉफ्ट पावर।
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