भारतीय ज्ञान-परंपरा से समकालीन शिक्षक-शिक्षा तक: एनईपी 2020 एवं आईटीईपी के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • डॉ. नीलम सिंह (अतिथि संकाय), स्कूल ऑफ एजुकेशन फैकल्टी, डॉ बी. आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली Author

DOI:

https://doi.org/10.65785/vijact.v2i7.72

Abstract

भारतीय ज्ञान-परंपरा में शिक्षा को केवल ज्ञान के संप्रेषण की प्रक्रिया न मानकर व्यक्ति के सर्वांगीण विकास करने का कार्य माना जाता है। जिससे छात्रों में जीवन के उच्चतर मूल्यों का विकास, कला कौशल निपुण कर एक सशक्त नागरिक बनाने का प्रयास किया जाता है। इस परंपरा में शिक्षक अर्थात् आचार्य की भूमिका मात्र विषय-ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह शिक्षार्थी के बौद्धिक, नैतिक, मानसिक एवं व्यक्तित्वगत विकास का मार्गदर्शक था। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय शिक्षक-शिक्षा की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करना है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 एवं समन्वित शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटेप) में भारतीय ज्ञान-परंपरा के तत्वों के समावेशन का विश्लेषण करना भी शामिल है। अध्ययन गुणात्मक, वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रकृति का है तथा इसमें प्राचीन भारतीय ग्रंथों, शिक्षक-शिक्षा संबंधी नीतिगत दस्तावेजों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में शिक्षक की भूमिका एवं योग्यता, गुरु-शिष्य संबंध, श्रवण–मनन–निदिध्यासन, पंचपदी प्रणाली, पंचकोशीय विकास तथा बहुविषयक ज्ञा तत्वों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।

Keywords: भारतीय ज्ञान-परंपरा, शिक्षक-शिक्षा, पंचपदी, पंचकोश, एनईपी 2020, बहुविषयकता

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Published

2026-07-31

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भारतीय ज्ञान-परंपरा से समकालीन शिक्षक-शिक्षा तक: एनईपी 2020 एवं आईटीईपी के संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2026). VED International Journal of Arts, Commerce and Technology (VIJACT), 2(7), 48-53. https://doi.org/10.65785/vijact.v2i7.72