मुगल दरबार में अभिजात महिलाओं की सामाजिक एवं राजनीतिक भूमिका: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • गंगाधर गांगुली शोधार्थी, इतिहास विभाग, कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर Author
  • डॉ. अभिषेक अग्रवाल सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग, कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर Author

DOI:

https://doi.org/10.65785/mvxa9w88

Abstract

मुगल साम्राज्य केवल पुरुष सत्ता का केंद्र नहीं था, बल्कि उसके भीतर अनेक अभिजात महिलाओं ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह शोध पत्र मुगल दरबार में हरम की महिलाओं, विशेषकर बादशाह की माताओं, पत्नियों और बहनों की स्थिति का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है, कि किस प्रकार नूरजहाँ, जहाँआरा, हमीदा बानो बेगम और मरियम-उज़-ज़मानी जैसी महिलाओं ने प्रशासनिक निर्णयों, व्यापारिक गतिविधियों और सांस्कृतिक संरक्षण में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह अध्ययन गुणात्मक एवं मात्रात्मक दोनों प्रकार की पद्धतियों का उपयोग करते हुए ऐतिहासिक स्रोतों, समकालीन विवरणों और द्वितीयक साहित्य से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करता है। पाँच सारणीबद्ध आंकड़ों के माध्यम से महिलाओं की भूमिका को प्रशासनिक हस्तक्षेप, आर्थिक स्वामित्व, धार्मिक संरक्षण, राजनयिक प्रभाव और सांस्कृतिक योगदान जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। परिणाम दर्शाते हैं, कि 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच अभिजात महिलाओं की भूमिका में क्रमिक वृद्धि हुई, विशेषकर अकबर और जहाँगीर के शासनकाल में। यह अध्ययन पूर्ववर्ती शोधों से तुलना करते हुए यह स्थापित करता है, कि हरम केवल एक निजी स्थान नहीं बल्कि एक सक्रिय राजनीतिक इकाई था। निष्कर्ष में यह पत्र सुझाव देता है, कि मुगल इतिहासलेखन में महिलाओं की भूमिका को अधिक केंद्रीय स्थान दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह साम्राज्य की संरचना, वैधता और निरंतरता को समझने के लिए आवश्यक है। यह अध्ययन इतिहास, लैंगिक अध्ययन और राजनीति विज्ञान के अंतर-विषयक क्षेत्र में योगदान देता है।

Keywords: मुगल हरम, अभिजात महिलाएँ, राजनीतिक प्रभाव, नूरजहाँ, लैंगिक इतिहास, दरबारी संस्कृति,  आर्थिक स्वामित्व

Downloads

Download data is not yet available.

Downloads

Published

2026-02-28

How to Cite

मुगल दरबार में अभिजात महिलाओं की सामाजिक एवं राजनीतिक भूमिका: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2026). VED International Journal of Arts, Commerce and Technology (VIJACT), 2(2), 72-80. https://doi.org/10.65785/mvxa9w88