गुप्त साम्राज्य में कृषि व्यवस्था और कृषक जीवन: एक ऐतिहासिक अध्ययन

Authors

  • प्रोफे० शैलेन्द्र कुमार शर्मा प्राचार्य, चौधरी चरण सिंह डिग्री कालेज हेवरा, इटावा, उ० प्र० Author
  • डॉ० कृष्ण कान्त सहायक आचार्य, चौधरी चरण सिंह डिग्री कालेज हेवरा, इटावा उ० प्र० Author

DOI:

https://doi.org/10.65785/vijact.v2i9.118

Abstract

गुप्त साम्राज्य भारतीय इतिहास का वह कालखंड है जिसमें प्रशासन, कला और अर्थव्यवस्था के अनेक पक्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ। इस शोधपत्र का उद्देश्य गुप्तकालीन कृषि व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं और उसमें जीवन बिताने वाले कृषकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का ऐतिहासिक विश्लेषण करना है। अध्ययन ऐतिहासिक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें उपलब्ध साहित्यिक, अभिलेखीय और आधुनिक इतिहासलेखन से जुड़े संदर्भों का तुलनात्मक उपयोग किया गया है। विवेचन में भूमि संबंध, भूमि-अनुदान, सिंचाई और कृषि तकनीक, भू-राजस्व तथा ग्रामीण समाज की संरचना को केंद्र में रखा गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि कृषि उत्पादन राज्य की आय और ग्रामीण स्थिरता का मुख्य आधार था, किंतु उसके लाभ सभी कृषक वर्गों में समान रूप से नहीं बँटे थे। भूमिधारी कृषक, आश्रित कृषक और कृषि श्रमिकों की परिस्थितियाँ भिन्न थीं, और क्षेत्रीय परिस्थितियाँ भी उत्पादन के स्वरूप को प्रभावित करती थीं। निष्कर्षतः गुप्तकालीन कृषि व्यवस्था को न केवल समृद्धि का और न केवल शोषण का युग मानना उचित है। इसे उत्पादन, कर और सामाजिक संबंधों के जटिल संतुलन के रूप में समझना आवश्यक है।

Keywords: गुप्त साम्राज्य, कृषि व्यवस्था, कृषक जीवन, भूमि संबंध, भू-राजस्व

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Published

2026-09-30

How to Cite

गुप्त साम्राज्य में कृषि व्यवस्था और कृषक जीवन: एक ऐतिहासिक अध्ययन. (2026). VED International Journal of Arts, Commerce and Technology (VIJACT), 2(9), 15-21. https://doi.org/10.65785/vijact.v2i9.118